बात कुछ हम से बन न आई आज
बोल कर हम ने मुँह की खाई आज
चुप पर अपनी भरम थे क्या क्या कुछ
बात बिगड़ी बनी बनाई आज
शिकवा करने की ख़ू न थी अपनी
पर तबीअत ही कुछ भर आई आज
बज़्म साक़ी ने दी उलट सारी
ख़ूब भर भर के ख़ुम लुंढाई आज
मासियत पर है देर से या रब
नफ़्स और शरा में लड़ाई आज
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