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आज का शब्द: नायिका और अनामिका की कविता- धूर्त नायक ने जब एक आसन पर बैठी अपनी दोनों प्रेमिकाओं को देखा

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- नायिका, जिसका अर्थ है- रूप-गुण से युक्त युवा स्त्री जो शृंगार रस का आलंबन हो, काव्य, नाटक आदि की प्रधान महिला पात्र। प्रस्तुत है अनामिका की कविता-  धूर्त नायक ने जब एक आसन पर बैठी अपनी दोनों प्रेमिकाओं को देखा
                                                                 
                            

रीतिकाल की कविता में 
बच्चों की इतनी ही चर्चा है 
कि वे पैदा हुए! 
पालने में उनको सुला-फुलाकर 
चली परकीयाएँ 
आदर्श प्रेम की अनंत-सी तलाश में! 
एक दोहे में बिहारी ही 
कहते हैं कि बच्चा पैदा हुआ, 
पिता ज्योतिषी था, 
कुंडली बनाई बेटे की तो 
पितृघातक योग देखकर डरा, 
पर दूसरा योग ‘जारज’ जो दीखा 
तो मनमोदक लूटता हुआ 
सोचने लगा कि मरेगा रक़ीब! 
परकीया के बच्चे 
कभी तो बडे़ होते होंगे ही, 
पचपन प्रवाद घेरते होंगे उनको, 
क्या पूछते होंगे माँ से वे, 
माँएँ क्या कहती होंगी उनसे— 
सोचती हुई दंग हूँ, 
तंग हूँ 
ये भी पढ़कर कि 
‘‘एक धूर्त नायक ने 
जब एक आसन पर बैठी 
अपनी दोनों प्रेमिकाओं को देखा 
तो आँख-मिचौली भाव से 
एक की आँख मूँद ली 
और गर्दन घुमाकर 
दूसरी का मुँह फट चूम लिया।’’  आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

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