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आज का शब्द: जगती और हरिवंशराय बच्चन की कविता- साथी, सब कुछ सहना होगा !

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- जगती, जिसका अर्थ है- संसार, दुनिया, पृथ्वी, जीवन। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- साथी, सब कुछ सहना होगा 
                                                                 
                            

साथी, सब कुछ सहना होगा!

मानव पर जगती का शासन,
जगती पर संसृति का बंधन,
संसृति को भी और किसी के प्रतिबंधो में रहना होगा!
साथी, सब कुछ सहना होगा!

हम क्या हैं जगती के सर में!
जगती क्या, संसृति सागर में!
एक प्रबल धारा में हमको लघु तिनके-सा बहना होगा!
साथी, सब कुछ सहना होगा!

आओ, अपनी लघुता जानें,
अपनी निर्बलता पहचानें,
जैसे जग रहता आया है उसी तरह से रहना होगा!
साथी, सब कुछ सहना होगा!

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9 महीने पहले

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