'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- च्युत, जिसका अर्थ है- गिरा हुआ, भ्रष्ट, विमुख। प्रस्तुत है रामकुमार वर्मा की कविता- मौन झींगुर उस अँधेरी रात का हैं गान करते
मौन झींगुर उस अँधेरी रात का हैं गान करते;
और तारे क्या परस्पर देख कर पहचान करते?
सुमन अपने रूप का, अपनी सुरभि का दान करते;
और अनिल तरंग अविदित रूप से मधु-पान करते।
मैं उठा हूँ जाग, यह जग
मृतक-सा क्यों रह गया है?
एक ही जीवन अनेकों
मृत्यु पर ज्यों बह गया है!
यह निशा काली-पवन ने साँस ली मानी ठहर कर;
पंख की ध्वनि-पक्षि-शावक का ध्वनि टूटा हुआ स्वर।
और पत्ते का पतन! जो अचर से कुछ हो गया चर;
देखकर मैंने कहा—अः यह निशा का मौन अंबर
शांत है, जैसे बना है साधु—
संत निरीह निश्छल;
किंतु कितने भाग्य इसने
कर दिए हैं नष्ट, निर्बल।
यह जगत है! शांति में गोपित किए हैं पाप प्रतिक्षण;
मृत्यु की छाया निशा-सी छू रही अविराम कण-कण।
हाथ को निर्बल बनाने के लिए है स्वर्ण-कंकण;
दे चुका तम-मृत्यु को नभ-तारिका-जीवन-समर्पण।
च्युत हुए पत्ते-सदृश पल में
कभी तुम टूट जाओ;
यदि सहो, तो शांति, या फिर
नित्य निखिल अशांति पाओ।
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