सन् 1998 में फ़िल्म आयी थी ‘दिल से’, जो अपनी पटकथा से ज्यादा अपने गानों के लिए मशहूर हुई, उसमें भी वह गाना जिसे लीक से हटकर फ़िल्माने का निर्णय लिया गया था और उस गाने का अपना एक इतिहास बनकर तैयार हो गया।
वह ऐतिहासिक गाना था ‘छैंया-छैंया’ जिसे शाहरूख खान और मलाइका अरोड़ा पर फ़िल्माया गया है। इसके ख़ास होने का कारण यह था कि इसे चलती ट्रेन के ऊपर फ़िल्माया गया था। इसके अलावा यह गाना सुनने में भी उतना साधारण नहीं है। इस गाने को जितनी बार सुनते हैं, उतनी बार इसके पीछे बजने वाली बीट्स के साथ आपके कदम ताल मिलाने लगेंगे और इस तरह अपनी धुनों से सुनने वालों को मोह जाल में कैद करने लेने का हुनर रहमान का संगीत ही कर सकता है। फ़राह खान के निर्देशन पर जैसे शाहरूख ने डांस किया है कुछ उसी खुमार में दर्शक भी मदहोश हो जाते हैं। आलम ये है कि आज भी लगभग 20 साल बाद भी यह गाना कहीं सुनाई दे जाए तो आप थिरकना शुरू कर देंगे।
यह गाना सूफ़ी तर्ज पर बना है और थैया-थैया के नाम से मशहूर है जिसे बुल्लेशाह ने लिखा है। गायक सुखविंदर ने इस गाने को बनाने के लिए रहमान को सुझाव दिया, तब गुलज़ार ने इसके बोलों को दोबारा लिखा, जब इसे फ़िल्म के निर्देशक मणि-रत्नम को सुनाया गया तो उन्होंने इसे पहली बार में ही रेल के ऊपर फ़िल्माने की ठान ली और इस तरह मेरे पसंदीदा नग़मों में से एक बनकर तैयार हो गया। कमाल के संगीत, बोल, गायन से बना यह नग़मा अपने आप में एक सम्पूर्ण सागर है जिसके स्वाद को चखने वाला उसमें डूब जाता है।
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यह गाना सूफ़ी तर्ज पर बना है...
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