लोग तेरे कायल, तेरे दीवाने हो गये।
रोशन-अफ़रोज़ सारे वीराने हो गये।।
हम भी कभी यूं बहुत करीब थे तेरे।
मगर ये किस्से,काफ़ी पुराने हो गये।।
उसूलों की दुहाई देना भी फ़जूल है।
जो नादां थे, वो अब सयाने हो गये।।
ये तर्क-ए-ताल्लुक जिद थी तुम्हारी।
मुझे शिकवा करे तो ज़माने हो गये।।
मेरा सच भी , झूठ समझते हैं लोग।
मेरी हर बात,अब मेरे बहाने हो गये।।
-यूनुस खान
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