सब चिट्ठी और ख़त-ओ-पैग़ाम तुम्हारे।
हर सफहे में छिपे हैं, बस नाम तुम्हारे।।
तेरी तहरीर को, सीने से लगा लिया है।
सर-आंखों पे रखे हैं, अहकाम तुम्हारे।।
-यूनुस खान
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