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कुछ ना मिलेगा, दूर जाकर सन्नाटों के सिवा

                
                                                         
                            सबब-ए-तर्क-ए-ताल्लुक जेर-ए-नज़र कर लें।
                                                                 
                            
आओ मिलकर फांसले हम मुख्तसर कर लें।।

कुछ ना मिलेगा, दूर जाकर सन्नाटों के सिवा।
बेहतर होगा इस वीरान मकां को घर कर लें।।
-यूनुस खान
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16 घंटे पहले

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