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खुशियाँ तो मुझे भी प्यारी थी

                
                                                         
                            खुशियाँ तो, मुझे भी प्यारी थी,
                                                                 
                            
मगर मै क्या करता, बहुत जिम्मेदारी थी !!
मुस्कुराना-चहकना, किसे पसंद नहीं,
मगर मेरे हिस्से,रोने की बीमारी थी,
खुशियाँ तो, मुझे भी प्यारी थी,
मै क्या करता, बहुत जिम्मेदारी थी !!
हौसला कहाँ कम है मुझमें,मै लड़ा उम्र भर,
मै हारा भी तब,जब जीत की तैय्यारी थी,
खुशियाँ तो, मुझे भी प्यारी थी,
मै क्या करता, बहुत जिम्मेदारी थी !!
अ खुदा तुझसे शिकवा, रहा है ओर रहेगा,
मेरी शिद्दत मै क्या कमी थी,क्या गलती हमारी थी !!
खुशियाँ तो मुझे भी प्यारी थी,
मगर मै क्या करता, बहुत जिम्मेदारी थी !!
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4 घंटे पहले

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