"नवरात्रि"

                
                                                             
                            नवरात्रि के नव दिन पावन,
                                                                     
                            
लगता है सबकुछ मनभावन।

हे अम्बे ,मेरी जगदम्बे,
तेरी महिमा न्यारी है जग में।

मां अष्ट भुजाओं वाली हो,
पापों को हरने वाली हो।

भरती हो सबकी खाली झोली,
करती हो सबकी मुरादें पूरी।

नवरात्रि के नौ दिन पूरे,
मंगलगान करते हैं सारे।

रास करें और गरबा खेलें,
झूमें नाचें मस्ती में गायें।

नवरात्रि के नव रातों में,
करते हैं मां का जगराता।

दशमी को कर दहन रावण का,
विजयादशमी मनाते हैं फिर।

बुराई पर अच्छाई की जीत,
नवरात्रि की यही है सीख।

वन्दना नामदेव

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
2 years ago
Comments
X