Urdu Poetry: हम-सफ़र साथ तो चल जितनी सड़क बाक़ी है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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फिर तुझे और मुझे और कहीं जाना है
हम-सफ़र साथ तो चल जितनी सड़क बाक़ी है
- शकील जाज़िब

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सामने बैठी हुई थी और मेरा दिल न था
फ़ोन पर ही उस से इतना प्यार कर बैठा था मैं
- ज़िया मज़कूर

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सुनो कि अब हम गुलाब देंगे गुलाब लेंगे
मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा
- जावेद अनवर

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ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है
वही होता है जो मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है
- मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

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आप की याद आती रही रात भर
चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर
- मख़दूम मुहिउद्दीन

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मुझे है ए'तिबार-ए-वादा लेकिन
तुम्हें ख़ुद ए'तिबार आए न आए
- अख़्तर शीरानी

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Urdu Poetry: सारी दुनिया हमें पहचानती है

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