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तेरे इंतज़ार का दीया पलकों की चौखट पर रखते हैं।

                
                                                         
                            तेरे जाने के बाद मैंने तुझे कहां-कहां नहीं ढूंढा,
                                                                 
                            
तेरा पता तो मैंने चांद और सितारों से भी पूछा।

कपोलों पर ढरककर आंसू हमें दिन रात तपाते हैं,
तेरे ख्याल आहों की आग में सुलगाकर जलाते हैं।

मंदिर में जाकर भी हम सिर्फ तुझको ही याद करते हैं,
तेरे इंतज़ार का दीया पलकों की चौखट पर रखते हैं।

तू नहीं है ,पर लगता है कि तू यहीं कहीं है ,
तेरी याद मेरे दिल से क्यों जाती नहीं है।
- राजलक्ष्मी राज
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11 घंटे पहले

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