आधी रात से चाँद तक
आधी रात के मौन गगन में,
आजादी का स्वर लहराया।
बिखरे मोती रियासतों के,
एक मुकुट में देश सजाया।
हमने अपने हाथों मिलकर,
अपना संविधान बनाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
मतपेटी जब द्वार पर पहुँची,
जनता का अधिकार जगाया।
बाँधों ने नदियों को थामा,
खेतों तक फिर नीर पहुँचाया।
कारखानों और ज्ञान-केंद्रों ने,
आत्मनिर्भर स्वप्न सजाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
गेहूँ की बालियाँ झूमीं,
हरित क्रांति ने रंग दिखाया।
खाली पड़े अन्न-भंडारों को,
धरती माँ ने फिर भरवाया।
श्रम, सिंचाई और नए बीजों ने,
भारत को सक्षम बनाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
बैंकों की बंद देहरी को,
राष्ट्रीयकरण ने खुलवाया।
थुम्बा से जब रॉकेट निकला,
नभ का सपना पास बुलाया।
विज्ञान की नई उड़ान ने,
इसरो का आधार बनाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
दूध की खाली गागर भरकर,
श्वेत क्रांति ने सुख बरसाया।
गाँव-गाँव सहकार जगा तो,
पशुपालक ने मान कमाया।
दूध की बढ़ती निर्मल धारा ने,
भारत को अग्रणी बनाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
विशेषाधिकार की दीवारों को,
देश ने मिलकर दूर हटाया।
पोखरण की सोई रेत ने,
भारत का सामर्थ्य बताया।
आर्यभट्ट ने नभ को छूकर,
विज्ञान का गौरव बढ़ाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
कंप्यूटर ने दस्तक दी तो,
नए समय का द्वार खुलाया।
दूरसंचार की लहर उठी,
दूर बसे जन पास बुलाया।
इन्सैट ने नभ से जुड़कर,
मौसम-संचार घर पहुँचाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
अर्थ-जगत की बंद खिड़कियाँ,
नए सुधारों ने खुलवाया।
कुंजीपट पर उँगली दौड़ी,
युवा हुनर ने नाम कमाया।
पंचायत में नारी आगे,
पोखरण ने बल दिखलाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
स्वर्णिम चौकोर सड़कों ने,
चार नगरों को पास बुलाया।
सूचना का अधिकार मिला तो,
जनता का विश्वास बढ़ाया।
चंद्रयान ने चाँद की मिट्टी में,
जल का संकेत दिखलाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
मंगलयान चला नभ-पथ पर,
पहले प्रयास में लक्ष्य पाया।
जनधन, आधार और मोबाइल ने,
सेवा को घर-घर पहुँचाया।
यूपीआई ने जग को जोड़ा,
सौर-मंच पर पथ दिखलाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
सूनी सड़कें, बंद दरवाजे,
फिर भी भारत ना घबराया।
अपने टीके स्वयं बनाकर,
कितने जीवन को बचाया।
चाँद के दक्षिण छोर के पास,
चंद्रयान ने पाँव जमाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
जी-बीस के खुले मंच से,
विश्व को एक साथ बुलाया।
सूरज की राह पर आदित्य ने,
विज्ञान का विस्तार दिखाया।
तेज अर्थ-गति, युवा शक्ति ने,
जग में भारत-मान बढ़ाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
मैदानों में बल्ला बोला,
क्रिकेट ने इतिहास बनाया।
चौसठ खानों पर बुद्धि चली,
शतरंज ने विश्व चौंकाया।
कुश्ती, भाला, बैडमिंटन ने,
भारत का सम्मान बढ़ाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
मिट्टी से आकाश नापकर,
भारत ने इतिहास बनाया।
बैलगाड़ी से चंद्रयान तक,
अद्भुत अपना सफर सजाया।
जन-जन के श्रम और सपनों ने,
कल का सूरज आज उगाया।
हर दशक संकल्प बढ़ा,
भारत ने परचम लहराया॥
—संतोष कुमार शर्मा
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