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नसीब न पाये रिश्ते

                
                                                         
                            जवानी की दहलीज के साथ बनाये रिश्ते।
                                                                 
                            
ज़माने के प्रभाव से सम्भाल न पाये रिश्ते।।

उस मोड़ से आगे जिस्म जरूर निकल गया।
मगर दिल ने किसी तरह भुला न पाये रिश्ते।।

हमसफ़र का चुनाव मजबूरी में करना पड़ा।
इज़्ज़त बनाए रखी सही तवज्जो न पाये रिश्ते।।

कहे भी तो किससे लिखना शुरू कर दिया।
जज्बात उभर कर आए नसीब न पाये रिश्ते।।

एक कमी आज भी महसूस होती तन्हाई में।
जिन्दगी में दुबारा कभी मौका न पाये रिश्ते।।

जिन्दगी गुजर रही मुस्कान कायम 'उपदेश'।
छुपाकर आँसू बहाए तसल्ली न पाये रिश्ते।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक घंटा पहले

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