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शिक्षित और विकसित सोच का परिणाम यही।

                
                                                         
                            प्रश्न बेशक कठिन पर उत्तर मेरा सरल रहा।
                                                                 
                            
व्यवहार ना जाने क्यों उनसे मेरा तरल रहा।।

मन में कुछ मगर जुबान पर रखे कुछ और।
देख रही उनका नजरिया पल-पल बदल रहा।।

लिव इन रिलेशनशिप रहने में मज़बूर कैसी।
फिर भी तर्क-वितर्क में कहीं न कहीं छल रहा।।

शिक्षित और विकसित सोच का परिणाम यही।
जिम्मेदारी से बचते मर्द स्त्री का पैर फ़िसल रहा।।

अकेलापन दूर करने के विकल्प को 'उपदेश'।
अपना होकर भी इंसान अपनों से संभल रहा।।

मार न जाए रिश्ते उम्र के साथ नसीहत मिलती।
तरसेगे अपना कहने को ऐसा ज्ञान प्रबल रहा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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42 मिनट पहले

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