जीवन का रस अब रहा कहाँ?
एकांत मुझको बुला रहा
वो सुंदर घटा जो बीत गयी,
मस्ती की वो थी रीत गयी
सुंदर सी वो फुलवारी अब कहाँ?
एकांत मुझको बुला रहा
जो हाथ में आकर चली गई,
एक स्पर्श मात्र से दूर हुई
खुशियों की हरियाली अब कहाँ?
एकांत मुझको बुला रहा....
ना जानू की क्या वो सोच रही,
जीवन की धारा सूख गयी
संतोष हैं कि,मैं सही यहाँ
एकांत मुझको बुला रहा.... एकांत मुझको बुला रहा
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