शब्दों में हो शालीनता,
कर्मों से हो पहचान,
विनम्रता मेरा आचरण हो,
स्वाभिमान मेरी शान।
सम्मान मिले तो वाणी मधुर,
तिरस्कार मिले तो मौन सही,
जो स्वयं का मान बचा ले,
वही राह सर्वश्रेष्ठ और सही ।
-दीपा
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