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ऊँच नींच का झगड़ा

                
                                                         
                            मुझमें, तुममें,
                                                                 
                            
तुममें, हममें,
जीव, जंतु और,
हर जीवन में,
एक ही आत्मा,
है हम सब में,
फिर काहे का रगड़ा,
ऊंच-निंच का झगड़ा,
प्रभु जी,
ऊंच-निंच का झगड़ा,

ना कोई छोटा,
बड़ा ना कोई,
प्रभु मूरत सब में,
एक होई,
जात-पात फिर,
करे क्यों कोई,
फिर काहे का रगड़ा,
ऊंच-निंच का झगड़ा,
प्रभु जी,
ऊंच-निंच का झगड़ा,

जिस माटी की,
काया तेरी,
उस माटी की,
देह ये मेरी,
जिसने जीवन,
तुमकों दिया है,
उससे जीवन,
मुझको मिला है,
फिर काहे का रगड़ा,
ऊंच-निंच का झगड़ा,
प्रभु जी,
ऊंच-निंच का झगड़ा,

सूर्य ज्ञान दे,
समरसता का,
पवन भी समरस,
होकर बहे है,
प्यास ये नदियाँ,
सबकी बुझाएँ,
तरुओं के फल,
हर कोई खाये,
फिर काहे का रगड़ा,
ऊंच-निंच का झगड़ा,
प्रभु जी,
ऊंच-निंच का झगड़ा,

आओ छोड़े,
जातिवाद को,
सबको गले लगायें,
मानवता है जाति हमारी,
सबको ये समझायें,
एक स्वर में राष्ट्रवाद का,
नारा फिर दोहरायें,
रगड़ा छोड़े ऊँच-नींच का,
झगड़ा ये निपटायें,
समरस हो फिर समरसता की,
ज्योत से ज्योत जलायें,
प्रभु जी,
ज्योत से ज्योत जलायें,

 
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8 घंटे पहले

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