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मिज़ाह निगार* के मरकज़ में

                
                                                         
                            ज़िंदगी
                                                                 
                            
तुझे अ ज़िंदगी!
बहुत करीब से देखा हमने।
तंज़- ए -महफ़िल में
बहुत ख़ास से देखा हमने।
यारों की सोहबत में
कमतरी के एहसास में
तरबतर देखा हमने ।
आमिल फ़ाज़िल से
हज़ूम में कुछ अलग से
रंग में देखा हमने ।

मिज़ाह निगार* के मरकज़ में
तंग दिल से कुछ उम्रदराज़
'कम-ज़रफ़'
गोया के सफ़ीला को
सरे शाम देखा हमने।
*व्यंग्यकार

तुझे अ ज़िंदगी आज
हैरां सा परेशां सा
देखा हमने।
-सूर्यकांत शर्मा
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5 घंटे पहले

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