जाति-पाति का भेदभाव भी, जब मिट जायेगा सारा
जब लिंग-भेद भी मिट जायेगा, जब मन मुट्ठी में सिमट जायेगा
जब कमी न कोई सताएगी, जब दिल ईर्ष्या से हट रहेगा
जब अमल धर्म पर हो जायेगा, जब आडम्बर घट जायेगा
जब जितना है उतने में ही, खुश रहना सीखेगा जग सारा
जब गुस्से पर काबू होगा, और चढ़ न पायेगा नित पारा
जब सारे बिचौलिए मिट जायेंगे, जब चापलूस भी मिट जायेगा
जब शिक्षक शिक्षा पूरी देंगे, जब इलाज का जज्बा आएगा
जब नीयत के चक्र जाल को, बुद्धि का फतवा आएगा
जब सजा सख्त हो जाएगी, और नियम भी लागू हो जायेगा
जब तकनीक भी उम्दा हो जाएगी, जब नक्काल भी भागू हो आयेगा
जब जिम्मेदारी आ जाएगी, जब झूठ नहीं टिक पायेगा
जब दफ्तर में अधिकारी, बैठे बैठे नहीं बिक पायेगा
जब जेलें खाली हो जाएँगी, जब सच का भाव आ जायेगा
जब तकनीकी इंसानों को, घर बैठे जॉब आ जायेगा
जब थानों में भीड़ नहीं होगी, जब मसला टिक नहीं पायेगा
जब कोर्ट में पेंडिंग फ़ाइल का, बण्डल जज को दिख जायेगा
जब अधिकारी दफ्तर में रहकर, बस अपना काम दिखायेगा
जब हर काम नियम से होगा, और कोई रिश्वत नहीं खायेगा
जब जेबें खाली होने पर भी, मन विचलित नहीं हो पायेगा
जब अधर्म के सारे कार्यों में, दिल सम्मिलित नहीं हो पायेगा
इतना सक्षम जब हो जायेगा, जब चरित्र निर्माण हो जायेगा
यह देश तरक्की कर जायेगा, जब जन-निर्माण हो जायेगा
-सुधीर बंसल
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