स्वस्थ वृक्ष की जड़ में
जब कोई रोग लग जाता है,
एक ही छोटा-सा कीड़ा
संपूर्ण वृक्ष खा जाता है।
ऐसा माली किस काम का
जो उपचार न कर पाता है,
कीड़ा लगने से पहले ही
कोई युक्ति न कर पाता है।
वृक्ष के फल को खाने वाले
दृष्टि गड़ाए रहते हैं,
वृक्ष नष्ट हो जाने पर फिर
बैठ शोक वे करते हैं।
साँप निकल जाने के बाद
लाठी को पीटते रह जाते हैं,
पछताने शोक मनाने ने पर,
बिगड़े काम नहीं बन पाते हैं।
कर लो सारे जतन समय पर,
वृक्ष सूखने से पहले,
अच्छा माली वही कहलाए,
जो सोचे संकट आने से पहले।
रोग जड़ में पनप रहा हो,
तब ही उसे मिटाना है,
समय पूर्व जो चेता समझो,
तभी वृक्ष बच पाना है
"अंजाना" का संदेश यही
संकट से सजग पहले हो ,
बाद में पछताने से बेहतर
पहले ही उचित उपाय कर लो।
-सूबा लाल “अंजाना”
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