भारत माता के माथे पर बिंदी बना सौभाग्य दर्शाती ।हिंदुस्तान की राजभाषा,मातृभाषा कहलाती।।
देवनागरी में लिखी जाती, हर वर्ण, हर मात्रा विशेष स्थान पाती ।
इसमें भावों का संसार सजाया,
जन जन ने इसे अपनाया।।
व्याकरण कराता शुद्धता का ज्ञान।
कविता ,कहानी, नाटक साहित्य इसकी पहचान ।।
आज भी नमस्ते, नमस्कार दर्शाते हैं हमारे संस्कार । हिंदी का प्रयोग करना है हर भारतीय का अधिकार।।
नई पीढी़ भी करे प्रेम ,अपनी मातृभाषा से।
हिंदी दिवस मानते हैं हम हर वर्ष इसी आशा से।।
-सोमवती माहौर
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