सावन मास का सोमवार ,और नाग पंचमी का दिन,
भक्तों के लिए विशेष पूजन, और आस्था का दिन।
करते सम्मान नाग देवता का ,और करते पूजन,
इनकी कृपा बने रहने से ,रहता धरती का संतुलन।
जब राजा परीक्षित को, तक्षक नाग ने डस लिया,
उनके पुत्र जन्मेजय ने, बदला हेतु सर्प यज्ञ किया।
आस्तिक मुनि ने यज्ञ रोककर, साँपों की रक्षा की,
इसलिए पंचमी के दिन, नाग पंचमी की पूजा शुरू हुई।
शिवशंकर का नागों से है ,रिश्ता बेजोड़ अनमोल,
गले में विषधर लिपटे रहते ,भोलेनाथ के अनबोल।
पूजन स्मरण के साथ , सब जीवों के प्रति हो दया,
नाग पंचमी का त्योहार, देता हमें यही शिक्षा महान।
सीमा केडिया
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