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वादा टूटने लगता है

                
                                                         
                            गुजरते वक़्त के साथ सब बेगाना लगता है,
                                                                 
                            
जो कल की बात थी, वो भी अफ़साना लगता है।

वादा किया था ख़ुद से कि आँखें नम न होंगी,
मगर हर मोड़ पर यह वादा टूटने लगता है।

चाह थी जिस मंज़िल की, पहुँच न सके वहाँ,
अब रास्ते तो खुले हैं, पर दिल ही नहीं करता है।

साथी हो साथ तो काँटों का सफ़र भी लगे सुहाना,
वर्ना तो ऐश-ओ-आराम भी चुभने लगता है।
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6 घंटे पहले

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