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श्रीजगन्नाथ रथयात्रा स्तुति

                
                                                         
                            जय नीलाचल-नायक, जगत्पते दयामय।
                                                                 
                            
करुणासिन्धो! पालय मां, भवभय-हर सुखमय॥

बलभद्र-सुभद्रा सहित, भक्त-विहार-विभो।
नन्दीघोष-समारूढ़, मंगलमूर्ति प्रभो॥

दीन-दयाल, अनाथ-नाथ, जग-पालक भगवान।
रथ पर उतर जन-जन में, बाँटो प्रेम-विधान॥

महाप्रसाद-समत्व के, तुम अमर उद्घोष।
सेवा, प्रेम, समरसता, तुमसे पाते संतोष॥

छेरा-पहंरा की विभा, विनय-व्रत का मान।
सेवा से ही सिद्ध हो, जीवन का सम्मान॥

अंतर-रथ के सारथि, दो सद्बुद्धि-प्रकाश।
मिटे अहं, जागे करुणा, प्रेम बने विश्वास॥

चरण-रज का एक कण, हो जीवन का धाम।
युग-युग वंदित विश्वपति, अमर रहे तव नाम॥

शत-शत वंदन जगन्नाथ! कोटि-कोटि प्रणाम।
भव-सागर से तार दो, हे जगन्नाथ! सुखधाम॥

— श्री सनातन मुकुंद
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10 घंटे पहले

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