तोल-मोल के बोल को रखना
भावों के पलड़े पर
कभी गहन घाव हो जाते हैं
कुछ छोटी बातों पर।
है उगल रहा जो कटु वचन
वापस मिल जाएगा
जैसा बीज तू बोएगा
फल वैसा पाएगा
जब चढ़ा प्रत्यंचा छोड़ा है
इक बाण निशाने पर।
झूठ, द्वेष और लोभ, वहम्
का विष-घट लिए फिरें
झूठी आन और अहम् से
हम सब हैं भरे हुए
अब घड़ियाली अश्रु हैं दिखते
रिश्तो के मरने पर।
हुई काँव-काँव मुंडेरी पर
चौखट पर दस्तक है
औ’ बूढ़े पाँव, बोझ हो गए
चौखट के बाहर हैं
पाँव वही कभी थिरके थे जो
लल्ले के आने पर।
-जागृति
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