हृदय की हारिल है हिन्दी,
भावो का साहिल है हिन्दी।
हिन्दी हर राही का पथ है
सपनों की मंजिल है हिन्दी।
तुलसी,सूर,मीरा के मन में,
भक्ति की माला है हिन्दी।
दिनकर,प्रसाद,निराला के,
अधरों की ज्वाला है हिन्दी।
भूषण,केशव घनानन्द के,
हृदय का श्रंगार है हिन्दी।
सुभद्रा,कृष्णा,महादेवी के,
उज्ज्वल मन का प्यार है हिन्दी।
नव पीढी की वाणी बनकर,
निजपथ पर गतिमान है हिन्दी।
भारत मां का भाल सजाती,
हम सबका अभिमान है हिन्दी।
भावों के भव सौंदर्य पटल पर,
शब्दों का विस्तार है हिन्दी।
हशमत,अशमत अहसासों का
अखिल विश्व प्रसार है हिन्दी।
कल कल बहती संस्कृति का,
गीत गजल झंनकार है हिन्दी।
प्राणों के स्पंदन से उठता,
हृदय का उद्गार है हिन्दी।
उम्मीदों का अतुल खजाना,
शक्ति का संचार है हिन्दी।
कवि कलम जहां चढती है,
उस मन्दिर का द्वार है हिन्दी।
-संतराम शर्मा'हिन्दी'
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