आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गलतियाँ

                
                                                         
                            हम दूसरों की गलतियाँ ढूंढ़ते हैं-
                                                                 
                            
दूसरों की गलतियाँ ढूंढ़ते ढूंढ़ते
हमारे दिन बीत जाते हैं।
पता है,
हम क्या खोते हैं?
वह है समय,
जो लौटकर नहीं आता।

दूसरों के बारे में न सोचकर,
खुद की गलतियाँ देखो।
तब समय तुम्हारें साथ रहेगा,
कहीं खो नहीं जाएगा।

खुद की गलतियाँ देखोगे
तो खुद को सही समय पर
सुधार सकोगे
और समय को जीत लोगे।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
46 minutes ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर