कि अब तो कोशिशें भी हार रहीं हैं।
तेरी ज़िदें हमे हर पल मार रहीं हैं।
सुकून का एक पल भी नही बचा.......
जाने ये मंजिलें क्या क्या चाह रहीं हैं।
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