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ख़ामोश इक़रार

                
                                                         
                            हमें गुमान भी न हुआ,
                                                                 
                            
हम उनसे मुहब्बत कर बैठे।
ना जाने क्या से क्या हो गया,
यूँ ही हँसते-हँसते, चलते-चलते।

उन्हें देखते ही दिल ने बग़ावत की
वो ज़हीन थे, सिर्फ़ मुस्कुरा दिए
निगाहें के इशारे छुप छुप चले
यूँ ही हँसते- हँसते , चलते चलते ।

ज़माने की नज़रों से बचकर,
रूख़सार का गुलाल पढ़ लिया।
इकरार हुआ और वादा हुआ
यूँ ही हँसते- हँसते, चलते चलते ।

अब हर घड़ी एक मुंतज़िर है,
धड़कनों का शोर है जारी
जो कल तक महज़ एक अजनबी थे,
वो रूह के हमनवा बन गए चलते चलते ।
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8 घंटे पहले

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