तुझे सवाल कहूं या फिर जवाब कहूं,
तुझे हकीकत कहूं या फिर ख्वाब कहूं,
सचमुच तू मेरे अंदर भी है बाहर भी है,
तुझे एक नशा कहूं या फिर शराब कहूं|
-मनस्व
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