नारी का संकल्प
नारी का संकल्प हो तो,
झोपड़ी भी महल बन जाती है,
उसकी मेहनत और हौसले से
सूनी दुनिया भी सज जाती है।
वह चाहे तो मिट्टी से
सपनों का संसार बना दे,
अपने प्रेम और समर्पण से
हर कठिन राह आसान बना दे।
लेकिन जब आत्मसम्मान आहत हो,
तो वही नारी ठहर भी जाती है,
जिस महल को अपने हाथों से सजाया,
उसे भी पल भर में त्याग जाती है।
क्योंकि नारी के लिए
महल से बड़ा उसका सम्मान है,
जहाँ आत्मसम्मान सुरक्षित न हो,
वहाँ रहना भी उसके लिए अपमान है।
-रजनी
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