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झूठ से लगाव

                
                                                         
                            सच जानकर भी उस झूठ से इतना लगाव,
                                                                 
                            
कि सच सामने आए तो भी दिल करे इंकार।

जिसे आँखों ने देखा,
उसे दिल मानने को तैयार नहीं,
जिसे सच ने साबित किया,
उससे भी कोई सरोकार नहीं।

झूठ को सच मानने की ये कैसी आदत है,
सच्चाई से भागना भी तो एक तरह की आफत है।

ज़रा ध्यान दीजिए,
हर झूठ से इतना मोह
सिर्फ़ मासूमियत नहीं होता—
कहीं ये गहरे मानसिक संघर्ष का संकेत तो नहीं होता?

कभी-कभी इंसान झूठ इसलिए नहीं मानता
कि उसे सच पता नहीं होता,
बल्कि इसलिए कि
सच स्वीकार करने की हिम्मत नहीं होती।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
22 घंटे पहले

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