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जो न माना मानव

                
                                                         
                            जो न माना मानव तू तो पीछे फिर पछताएगा
                                                                 
                            
तेरा करा धरा ही सब कुछ तेरे सामने आएगा।
मेरी इस पावन धरती को धुआँ धुँआ ही कर डाला
ईंधन और बारूद से मेरा सीना चाक ही कर डाला।
ज़हरीली गैसों से मेरा गला घूँटता जाता है
क्यूँ मानव तू वन काटकर अपना घर बनाता है ?
मेरे बर्फ़ के पर्वत भी तो अब पिघलते जायेंगे
तड़पेंगे जब गर्मी से तो तूफ़ाँ खूब मचायेंगे।
समय है अब भी सोच ले मानव पीछे फिर पछताएगा
तेरा करा धरा ही सब कुछ तेरे सामने आएगा।
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5 घंटे पहले

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