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दहलीज़ पे...

                
                                                         
                            कुछ करने का
                                                                 
                            
मन ना करे

ऐसे कैसे हम
डरे डरे

दीद के तीखेपन...
से बख़्शा जाए

जानकरों को...
और ना आज़माया जाए!

अदाएं,
बेवकूफ़,
बनाती रहें...

सदाएं
वजूद,
तराशती रहें...

जो जो हो रहा है, होता रहे...

ख़ुद का सुख नहीं खोना हमें!

यादों की...
खट्टी डकारें...

यारों की...
तब थीं बातें...

जाने,
क्या होगा?

प्रभु,
कौन आपके सिवा?

एक भक्त
कुछ कुछ झूठा...

हर वक़्त
कुछ कुछ रूठा...

कैसी कुंठा?

कर्री गिरह...

कर दो रिहा...

सपना देने का... किसने कहा?

पल में उठने का.... कर दो इंतिज़ाम 

ख़्वाहिश-ए-नफ़्स का
कर दो काम तमाम!

मैं पा लूं वो ढलती शाम... हल्की बाम... मन का मुकाम...

-राहुल



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2 घंटे पहले

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