लोग जीने की उम्मीद छोड़ रहे हैं,
मुफ्त में गवां रहे है अपनी जान
कुछ तो शर्म करो देश के रहनुमा
कुछ तो शर्म करो इस देश के भगवान
अपनी काली करतूतों को इस तरह ना बढ़ाओ
मजबूर लाचारों को इस कदर ना रुलाओ
आलू प्याज के भाव बिक रहा है आज का इंसान
कुछ तो शर्म करो देश के रहनुमा
कुछतो शर्म करो इस देश के भगवान
तुम्हारे लिए छप्पन भोग है,
हमको है रोटी के लाले
हम मेहनतकश मजदूर ,हमारे किस्मत में लिखा है
रोना, हमारे हाथों में है छाले
तुमको चाय भी पीनी हो तो भरते हो हवाई उड़ान
कुछ तो शर्म करो देश के रहनुमा
कुछ तो शर्म करो इस देश के भगवान
देश के दाताओं की हम पर महिमा है भारी
उनसे हमको मिले है आसूं , हमको मिली है लाचारी
देश में फैलाकर चारों तरफ तबाही
नारा यही लगते हैं, अपना देश है महान
कुछ तो शर्म करो देश के रहनुमा
कुछ तो शर्म करो इस देश के भगवान
जो पहले कुछ भला कर गए, वो कर गए नादानी
अब आ गया है अपना अंत ,अब खत्म है अपनी कहानी
इंसान खो बैठा है अपना रंग रूप अपना वजूद
बस बाकी रह गए है कुछ नाम के निशान
कुछ तो शर्म करो देश के रहनुमा
कुछ तो शर्म करो इस देश के भगवान
अपना मकशद नहीं है किसी को करना बदनाम
जब रखते हो उच्चा नाम तो, कुछ अच्छा करो काम
हर बात की सीमा होती है
आखिर कब तक तमाशा देखेंगे
हम बनकर नादान
कुछ तो शर्म करो देश के रहनुमा
कुछ तो शर्म करो इस देश के भगवान
-रविन्द्र अमन
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