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आख़िर एक मर्द को चाहिए क्या?

                
                                                         
                            जब वह बाहर से थककर घर आए,
                                                                 
                            
तो बस दो पल सुकून चाहिए।
उसे कोई ऐसा चाहिए जो,
उसकी अनकही बातें समझ पाए,
उसकी उदासी महसूस कर पाए,
उसकी तन्हाई में साथ रह पाए।

उसके आँसू गिरने पर उसे जज नहीं,
उसे हील किया जाए।
उसको इज़्ज़त से कभी-कभी
अपने हाथों से रोटी खिला दिया जाए।
उसकी खामोशी में उठ रहे
अनेक विचारों को पढ़ पाए।

बिना उसके कुछ कहे
उसके दिल का हाल समझ लिया जाए।
कभी-कभी उसको उसके छोटे छोटे प्रयासों के लिए
साराह दिया जाए।

जब उसका आत्मविश्वास कम होने लगे,
तब उसे विश्वास और हौसला दिया जाए।
उसकी नींद में बेचैनी का कारण
जान पाए।
और जब लगे कि वह बहुत मेहनत कर रहा है,
तो बस
“I’m proud of you."
बोल दिया जाए।
- प्रिया
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एक घंटा पहले

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