आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मजबूर दिल

                
                                                         
                            मुझे छोड़ कर जाने वाले जुर्म क्या है मेरा बताओगे या यूं ही तुम होकर खफा हमें सताओगे
                                                                 
                            
तू भूल गया हमें जब से जाने किस राह चल पड़ा वफा की राह में देकर दर्द हमें सताओगे
मैं दास्तां ए दर्द ए दिल सुनाऊं कैसे मुलाकात हुआ मुश्किल तुम बढ़ा कर दर्द हमें रुलाओगे
ये नहीं सोचा कभी भुलाना तुम्हें है कितना मुश्किल खामोश शान है कब तब हमें सताओगे
कभी सोचा तुमने दूर तुमसे होकर हम न पा सके सकूं राह ए वफा तुम कब हमें आजमाओगे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
11 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर