शोहरत अपनी बढ़ाने वास्ते लहज़ा बदलना पड़ा आपको और राह ए उल्फत आज़मा के आपको रस्ता बदलना पड़ा हमें
मेरी महरूमी पे हसने वाले अंदाज़ तेरा समझ ना पाया मैं कभी जान कर इरादा पैमाना ए उल्फत अब समझना पड़ा हमें
है दर्द ये भी मिला ना अपने हिस्से की खुशी कभी होकर मायूस बुझा के दिया आस का अंदाज़ ए वफा समझना पड़ा हमें
मिला कर हमें खाक में खुश दिख रहे हो आज़ तुम बहुत किया साजिश खिलाफ बार बार तुमने ये सच कहना पड़ा हमें
कहूं हाल ए बदनसीबी अपना तुमसे कैसे बढ़ा कर मायूसी दिल में राह ए वफा हैसियत अपनी ही अब समझना पड़ा हमें
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