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काश हमको लौटा पाता, कोई वो बीता ज़माना

                
                                                         
                            चुप हूँ लेकिन चाहूँ दिल की बात, मैं तुमको बताना
                                                                 
                            
दर्द है इस दिल में कितना, चाहूँ तुमको मैं सुनाना

तुम ख़फ़ा हो मुझसे क्यूँ, जानूँ नहीं मैं तो क़सम से
जानती नाराज़गी तो, हमको आता है मनाना

दूर किस्मत ने किया है, दिल से तो चाहा नहीं था
काश तुम रुक जाते तो, मुमकिन हो पाता पास आना

तेरी चाहत में तो हमने, अपना सब कुछ है लुटाया
तेरी यादें ही हैं अब तो, मेरे जीने का बहाना

वक़्त यूँ बेरहम हो जाएगा, जाना ही न 'पारुल'
काश हमको लौटा पाता, कोई वो बीता ज़माना
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10 घंटे पहले

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