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यादों में बीते लम्हों के ये सोगवार रहती है

                
                                                         
                            तेरे बगैर ज़िन्दगी अब बेक़रार रहती है
                                                                 
                            
हर रात याद में तिरी ये अश्क़-बार रहती है

तुमसे बिछड़ के ग़म से मेरा वास्ता रहा सदा
हमको ख़ुशी की बात भी अब नागवार रहती है

दिल को लगाने की सज़ा शायद मिली है हमको भी
रंगों में दर्द के ही रंगी ये बहार रहती है

अब ज़िन्दगी गुज़ारनी है इंतिज़ार में तिरे
हर वक़्त याद तेरी इस दिल पर सवार रहती है

तुम बिन ये ज़िंदगी गुज़र तो जाएगी किसी तरह
यादों में बीते लम्हों के ये सोगवार रहती है
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8 घंटे पहले

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