मुख़्तसर सी ग़म की ये रात अभी बाकी है,
सुनहरी सहर से मुलाकात अभी बाकी है।
सदा रहता नहीं कितना भी हो गहरा अंधेरा,
दामन में उजाले की ख़ैरात अभी बाकी है।
उतर जाएगा दर्द का क़र्ज़ एक न एक दिन,
मुकद्दर में खुशियों की सौगात अभी बाकी है।
पूरे हो जाएंगे अधूरे ये अरमान सारे देखना,
मेरे अरमानों की तो बारात अभी बाकी है।
उम्र यूं ही बीत गई सारी तो क्या 'पारुल',
दिल तो जवान है मुझमे बात अभी बाकी है।
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