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क्यूँ प्यार कर बैठे

                
                                                         
                            यार क्यूँ हम भी प्यार कर बैठे
                                                                 
                            
दिल तुम्हीं पर निसार कर बैठे

कुछ न हासिल हुआ मोहब्बत में
दिल ही अपना फ़िगार कर बैठे

तुम पे कितना यकीं था हमको तो
झूठ पर  ए'तिबार कर बैठे

तुम न अहद-ए-वफ़ा निभा पाए
दिल को हम बे-क़रार कर बैठे

ज़िन्दगी में कभी मिलेंगे फिर
सोच कर इंतिज़ार कर बैठे

रूठी है हमसे मौत भी शायद
ज़ीस्त को तार-तार कर बैठे

अब हक़ीक़त भी ख़्वाब लगती है
हर नफ़स सोगवार कर बैठे
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10 घंटे पहले

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