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यहाँ ज़िंदा हो के भी सब हैं मुर्दा ज़िन्दगी में

                
                                                         
                            खडा चौराहे पर हर शख़्स तन्हा ज़िन्दगी में
                                                                 
                            
जिधर देखो उधर दिखता अंधेरा ज़िन्दगी में

दिखाई दे रहे हैं सब कुशादा ज़िन्दग़ी में
ग़मों की धूप में हर कोई झुलसा ज़िन्दगी में

हुजूम-ए-यास ने घेरा है सबको इस तरह से
नहीं दिखता किसी को अब उजाला ज़िन्दगी में

नज़र के सामने बीते हैं जाने कैसे मंज़र
दिखाई दे रहा कितना तमाशा ज़िन्दगी में

ये कैसी दर्द की आँधी चली 'पारुल' बताओ
यहाँ ज़िंदा हो के भी सब हैं मुर्दा ज़िन्दगी में
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15 घंटे पहले

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