भुलाकर मेरी तुम ख़ताएँ, मुझे तुम गले से लगा लो
न चाहा तुम्हें हम रुलाएँ, मुझे तुम गले से लगा लो
ढलेगा न सूरज मुहब्बत का अपनी कभी भी सनम अब
है चाहत की दिल में शुआएँ, मुझे तुम गले से लगा लो
कभी दर्द बन कर नहीं, अब शिफ़ा बन के ही रहना हमको
सदा करता है दिल दुआएँ, मुझे तुम गले से लगा लो
लिपट कर तुम्ही से सभी दर्दों-ग़म हम भुला आज देंगे
सुनो दिल की मेरे सदाएँ, मुझे तुम गले से लगा लो
नहीं अब जुदा है तेरे-मेरे ख़्वाबों का संसार 'पारुल'
हुई ख़त्म हैं सब सजाएँ, मुझे तुम गले से लगा लो
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