कुछ पेड़ों के पते अब भी याद हैं मुझे,
खेल के मैदान के किनारे का इमली का पेड़,
पुराने गोठ के पीछे लगा लीची का पेड़,
स्कूल की दीवार के बराबर जामुन का पेड़,
मेरे घर के आँगन का आम का पेड़,
मैकू लाल का दाड़िम का पेड़,
नहर से थोड़ी दूर वाला अमरूद का पेड़,
चौराहे से कुछ दूर, सड़क से सटा,
वो आवारा-सा पीपल का पेड़!
अब इनमें से कोई भी पेड़ वहाँ नहीं है।
उनकी जगह पर घर बने हैं
और उनके बाहर लगी हैं नेम प्लेट्स,
जो पता देती हैं उन घरों में रहने वाले
लोगों का!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X