आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मोबाइल की लत लगी

                
                                                         
                            मोबाइल की लत लगी
                                                                 
                            
आंखों की नींद उड़ी
कानो में छुट्टी पसीना
मोबाइल छेड छेड कर
तर्जनी घिसी उंगली हुई बौना
रात दिन जब भी खोले
मोबाइल उठकर बोले
कभी थका हारा ना
सवाल जवाब जितना करें
सेकंड में हल करें
जन जन के घट घट में
मोबाइल बोले अपना बोली
सोशल मीडिया में पोल खोलें
दूरदर्शन में समाचार आने से पहले
मोबाइल में सोशल मीडिया बवाल बोले ।
मोबाइल की लत लगी
हठ बढ़ी बच्चों की
दूध पिलाना है तो मोबाइल दिखाओ
खाना खिलाना है तो अम्मा कार्टून लगाओ
मोबाइल बना जीवन का हिस्सा
पूरी दुनिया में चल रही है इसकी किस्सा
नौजवानों के हाथ से मोबाइल छुटती नहीं
बिजनेसमैन की कान घिसती नहीं
बुढ़ों के मुंह से लार टपके
मोबाइल आया जीवन साथी बन के
पूरी दुनिया मोबाइल की आदि हुए
चिट्ठी पत्री गुम हुई
गीता रामायण के पुस्तकों में दीमक लगी
शिक्षक गण सब यूट्यूब में खेले
बच्चा सब ऑनलाइन बोले
किताब में लिखा सब मोबाइल में मिले
क्यों दिमाग किताब को झेले
सारी दुनिया ऑनलाइन से खेले ॥

(रेखा भारती -निर्मल ठाकुर )
(बनासो हजारीबाग झारखण्ड )
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर