आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कितनों को संग ।

                
                                                         
                            ऊँची, नीली गर्दन
                                                                 
                            
सिर पर है कलगी,
रंग-बिरंगे, लम्बे
सुंदरता है इसके पंख।
आए कुछ मुसाफिर
भ्रमण के लिए वन,
मीठी-मनमोहक खुशबू
पंख खोल लगा इतराने।
लालची ये मुसाफिर
मारकर ले गए उसके पंख,
झूम रहा था खुशियों में
बिना गलती के मिट गई हस्ती।
यही सच्चाई दुनिया की भी
लालच, ईर्ष्या, जलन,
न जाने ले गए
कितनों को संग ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर