बताने को क्या है मैं सब कुछ खो कर आया हूं
और ना पूछो के मैं कितना रो कर आया हूं
यह उम्र भर की लकीरें मेरे चेहरे पर छपी हैं
मैं अपनी औकात से ज्यादा बोझ ढोकर आया हूं
धक्के खाकर मावी सब्र का घूंट पिया है मैंने
मैं यहां तक खाते-खाते बस ठोकर आया हूं
दिन-रात चलते चलते जरा आंखें सूज गई है
और आप समझते हो कि मैं सो कर आया हूं
-नीटू मावी
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