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फिर मुड़कर वापिस वो ना आए,ना जाने

                
                                                         
                            हमको कुछ इस तरहा से,सताया था उसने
                                                                 
                            
खुद को हीर मुझे रांझा,बताया था उसने

हो जाएंगे किसी और के,वो भी एक दिन
फिर भर कर बाहों में मुझे रुलाया था उसने

कहकर गए थे हम कल,फिर आएंगे मिलने
जाते वक़्त एक बार,गले से लगाया था उसने

फिर मुड़कर वापिस वो ना आए,ना जाने
मेरा नाम लिख के दिल पे मिटाया था उसने

वो किनारे पर छोड़ गए,मछली डूब ना जाए
शायद कुछ ऐसा ही प्यार निभाया था उसने
-नीटू मावी
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16 घंटे पहले

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